शनिवार, 7 जनवरी 2017

Today's Reality Test

जो चला गया उसे भूल जाओ (भाग - 2)

बंधुओ,
                कल की एक अधूरी कहानी के साथ आज का नमस्कार ....
एक पिता अपनी चार वर्षीय बेटी से बहुत प्रेम करता था। ऑफिस से लौटते वक़्त वह रोज़ उसके लिए तरह-तरह के खिलौने और खाने-पीने की चीजें लाता था। बेटी भी अपने पिता से बहुत लगाव रखती थी और हमेशा अपनी तोतली आवाज़ में पापा-पापा कह कर पुकारा करती थी।
                दिन अच्छे बीत रहे थे की अचानक एक दिन बेटी को बहुत तेज बुखार हुआ, सभी घबरा गए, वे दौड़े भागे डॉक्टर के पास गए, पर वहां ले जाते-ले जाते बेटी की मृत्यु हो गयी। परिवार पे तो मानो पहाड़ ही टूट पड़ा और पिता की हालत तो मृत व्यक्ति के समान हो गयी। बेटी के जाने के हफ़्तों बाद भी वे ना किसी से बोलते ना बात करते…बस रोते ही रहते। यहाँ तक की उन्होंने ऑफिस जाना भी छोड़ दिया और घर से निकलना भी बंद कर दिया। आस-पड़ोस के लोगों और नाते-रिश्तेदारों ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की पर वे किसी की ना सुनते, उनके मुख से बस एक ही शब्द निकलता मेरी बेटी !

एक दिन ऐसे ही बेटी के बारे में सोचते-सोचते उनकी आँख लग गयी और उन्हें एक स्वप्न आया। उन्होंने देखा कि स्वर्ग में सैकड़ों बच्चियां परी बन कर घूम रही हैं, सभी सफ़ेद पोशाकें पहने हुए हैं और हाथ में मोमबत्ती ले कर चल रही हैं। तभी उन्हें बेटी भी दिखाई दी। उसे देखते ही पिता बोले , ” बेटी , मेरी प्यारी बच्ची , सभी परियों की मोमबत्तियां जल रही हैं, पर तुम्हारी बुझी क्यों हैं , तुम इसे जला क्यों नहीं लेती ?” बेटी बोली, ” पापा, मैं तो बार-बार मोमबत्ती जलाती हूँ, पर आप इतना रोते हो कि आपके आंसुओं से मेरी मोमबत्ती बुझ जाती है….”
                ये सुनते ही पिता की नींद टूट गयी। उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया, वे समझ गए की उनके इस तरह दुखी रहने से उनकी बेटी भी खुश नहीं रह सकती , और वह पुनः सामान्य जीवन की तरफ बढ़ने लगे।
                बंधुओ, किसी करीबी के जाने का ग़म शब्दों से बयान नहीं किया जा सकता। पर कहीं ना कहीं हमें अपने आप को मजबूत करना होता है और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना होता है। और शायद ऐसा करना ही मरने वाले की आत्मा को शांति देता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जो हमसे प्रेम करते हैं वे हमे खुश ही देखना चाहते हैं , अपने जाने के बाद भी…! और अगर आप भी उनको खुश देखना चाहते हो तो आज के वर्तमान मै खुश रहकर अपनी और परिवार की साथ ही जो चला गया उसकी बची हुई सारी जिम्मेदारी को खुश होकर पूरा करो, शायद उसकी आत्मा पास रहकर प्रसन्न नही हुई हो, पर दूर रहकर ज्यादा खुश हो जायगी ।

               बंधुओ, आज का लेख अच्छा लगा हो तो एक मेसेज मेरे नम्बर पर अवश्य करे। आपकी like मुझे हरपल कुछ नया करने को प्रेरित करेगी।

शुक्रिया उन सभी बंधुओ को, जिन्होंने मेरी पोस्ट को ध्यान से पढ़ा।

✍..महेन्द्र आल, देवासी युवा टीम 9610969896

गुरुवार, 5 जनवरी 2017

Today's Reality Test 

जो चला गया उसे भूल जाओ (भाग - 1)

बंधुओ,

मृत्यु एक ऐसा अटल सत्य हैं, जो हर किसी के साथ आना हैं, फिर भी हम इससे भयभीत रहते हैं । कब, किस पल, कंहा, आ जाए ये सिर्फ ईश्वर ही जानता हैं। यदि हम मृत्यु को जीत ले तो शायद प्रकृति की सारी दिनचर्या गड़बड़ हो जायगी। 

हर पतझड़ के बाद सावन जरूर आता हैं, यदि एक जाता हैं तो एक जरूर आता हैं ये नियम अनवरत काल से चला आ रहा हैं । फिर जाने वाले का गम क्यों करते हैं हम ?

                      बंधुओ, ये सत्य हैं की जो हमारा आज था वो चला गया । पर उसका भी कंही ना कंही सृजन हुआ होगा। एक बीज पेड़ से गिरता हैं, फिर उग जाता हैं । फिर दोष किसे दे। मेरे एक मित्र के परिवार मै दुर्घटना हुई परिवार के कुछ सदस्यों की मौत हुई। परिवार के कुछ सदस्य भगवान को कोसने लगे। क्या उचित हैं ये सब ? यदि भगवान सबको ही जीवित रखे तो क्या उसकी सत्ता चल पायेगी ? विचार करे? हमारे लिए हमारा परिवार और परिवार के हर सदस्य सर्वोपरि हैं, हम उनसे प्यार करते हैं । जब कोई एक भी बिछुड़ता हैं तो दुःख होता हैं, लेकिन क्या उसका गम हम जिंदगी भर पालते रहे ,उचित नही होगा ।

हँस कर जीना यही दस्तूर है ज़िंदगी का, एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का,
बीते हुए पल कभी लौटकर नहीं आते, बस यही एक कसूर है ज़िंदगी का ?

                    बंधुओ, एक छोटी सी कहानी से जिंदगी की हकीकत समझ आ जायगी की जो चला गया उसे भूल जाओ, वो जन्हा हैं उसे खुश रहने दो, हां अगर कुछ करना चाहते हो तो बार बार रोओ मत, उसके अधूरे सपने को पूरा करो। 

                    भूत के बीज जब वर्तमान में बोये जाते हैं तो उनके वृक्ष भविष्य को भी ढँक देते हैं. . इसीलिये, यदि वो बीज कड़वे फल के हों तो उन्हें बोने से भी बचना चाहिये और संजोने से भी. मतलब जो पुरानी यादे हैं उन्हें दिमाग से हटा दीजिये। नया बीज सामने हैं । ...... शेष कल के अंक में पढना ना भूले।             

शुक्रिया उन सभी बंधुओ को, जिन्होंने मेरी पोस्ट को ध्यान से पढ़ा।

✍..महेन्द्र आल, देवासी युवा टीम

बुधवार, 4 जनवरी 2017

Today's Reality Test 

मन मे नही रखे बुरे भाव

बंधुओ,

                वो कहावत याद है ना, मुख मे राम बगल मे छुरी तकरीबन आज हर इंसान की यही स्थिति हो गयी है, हर इंसान के दो चेहरे होते है, हाथी के दांत जैसे खाने के अलग, दिखाने के अलग। जो किसी के सामने आने पर हम सम्मान, आदर दिखाते है, हकीकत मे जाते ही ख़ुशी मनाते है कि बला टल गयी।

               दरअसल हम इतने स्वार्थी हो गए हैं की अब हर रिश्तों मे स्वार्थ ढूंढने लगे है, अब रिश्तों मे क्या मिल रहा है ये देखा जाने लगा है, वो समय गया जब हम रिश्तों मै समर्पण किया करते थे ।

             दरअसल हमारे अंदर ही दो इंसान है, एक सकारात्मक और एक नकारात्मक । हमारे मन को यदि एक कुआं मान लिया जाए तो जो मन मे भरा होगा वही बाहर निकलेगा ।

            एक चालक बूढ़े आदमी ने एक लड़के से बात  करते हुए कहा , की "मेरे अंदर दो भेड़िये हैं , जो आपस में लड़ते रहते हैं " एक ईर्ष्या , द्वेष, जलन, शर्म  और झूठ से भरा हुआ है , और दूसरा प्यार , ख़ुशी , सच  और शांति से भरा हुआ है।

ये लड़ाई तुम्हारे अंदर भी और सभी मनुष्यों के अंदर ये भेड़िये लड़ते रहते हैं. थोड़ी देर के लिए लड़के ने सोचा, और फिर पुछा ? "कौन सा भेड़िया जीतेगा "? बुजुर्ग आदमी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, जिस भेड़िये को तुम बढ़ाओगे वही जीतेगा।


             अच्छाई  बुराई सब कुछ हमारे ही अंदर विद्यमान है , हम जिसको बढ़ावा देते हैं वही मुखर होता है। मतलब यदि मन के कुएं मे अमृत होगा तो बाहर अमृत ही निकलेगा और यदि जहर होगा तो जहर निकलेगा ।

             बंधुओ, अभिप्राय ये है कि जो आप अंदर से हो और जो बाहर दिखाते हो उसमे भेदभाव क्यों करते हो,एक फ़िल्म थी दाग उसका गीत है एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग ।

            आपकी जिंदगी है, जैसे चाहे जीओ, पर एक बात का ध्यान रखिये की जो दिल मे हो वो जुबान पर लाओ, अच्छा या बूरा दोनों परिणाम आ सकते हैं, लेकिन आपको मन मे सुकून जरूर मिलेगा की हम जुबान और दिल से एक जैसे ही है ।


शुक्रिया उन सभी बंधुओ को, जिन्होंने मेरी पोस्ट को ध्यान से पढ़ा।

✍..महेन्द्र आल, देवासी युवा टीम

बुधवार, 28 दिसंबर 2016


@ नववर्ष 2017 की हार्दिक शुभकामनाओं सहित @

गुल को गुलषन मुबारक, चांद को चांदनी मुबारक, 
      शायर को शायरी मुबारक, आपको मेरी तरफ से नया साल मुबारक।। 

महेन्द्र पी. देवासी






शनिवार, 10 दिसंबर 2016

गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

Bharat Dewasi
Manju Dewasi

 



"तुफानो से कहो जरा औकात में रहे,
हम परो से नहीं, हौसलों से उड़ा करते है"

बहुत ही ख़ुशी हुई की हमारे भाई रतन देवासी और बहिन मंजू देवासी का RAS में चयन होने पर तहेदिल से हार्दिक बधाई।

कुछ वर्ष पहले समाज के लिए ऐसे पदों के लिए सपना देखना भी पाप जैसा लगता था पर धन्य है और हमें गर्व भी है की श्रीमान IRS निंबाराम जी, श्रीमान IRS भोला रबारी (भोलाराम जी), पी एल देसाई, डॉ रमेश देवासी, डॉ पांचाराम देवासी ने युवाओ के लिए प्रेरणा बनकर उस घनघोर अँधेरे में रास्ता खोजकर उजाले की ओर समाज को अग्रसर करने का जो काम किया है इसी का परिणाम है कि आप और हम विपरीत हालातो में भी आसमान की बुलंदियों को लगातार छु रहे है और दूसरी पीढ़ी का कारवां भी अब इतिहास रचने को तैयार है। हम उम्मीद करते है आपकी काबिलियत और तजुर्बा समाज और देश हित के विकास में सहभागी बनेगा।